मल्टी स्पेसिलिटी हॉस्पिटल में करोड़ों खर्च करने के बाद भी इलाज की सुविधा नहीं – विजय केशरवानी पूर्व बेलतरा विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशी

बिलासपुर /अरपा प्रवाह न्यूज़-शरद यादव

संपादक:शरद यादव
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अरपापार कोनी में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 220 बिस्तरों का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल आज छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निरीक्षण के बाद भी अस्पताल आज तक पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका है,भवन तैयार है, लेकिन जीवनरक्षक सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को अब भी दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष व बेलतरा विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय केशरवानी ने पत्र-वार्ता कर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवालों की लंबी फेहरिस्त जारी की है।
उन्होंने कहा कि जनता के करोड़ों रुपये खर्च कर हॉस्पिटल की इमारत नहीं बनाया गया बल्कि ऐसा हॉस्पिटल चाहा था जहां गरीब, किसान, मजदूर और आम नागरिक को समय पर आधुनिक इलाज मिल सके।

29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का लोकार्पण किया था,इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया तब उम्मीद जताई गई थी कि संभाग के लोगों को हार्ट, किडनी, न्यूरो सहित गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब रायपुर, भिलाई,नागपुर, हैदराबाद या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन डेढ़ साल बाद भी अस्पताल की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली
इमारत मौजूद है, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं,इलाज का इंतजार जारी है।
इसी वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि क्या केवल इमारत बना ,फीता काटकर हॉस्पिटल शुरू मान लिया जाता है, या फिर डॉक्टर, उपकरण, आईसीयू, कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, प्रशिक्षित स्टाफ,24 घंटे इमरजेंसी जैसी व्यवस्थाएं भी उसकी पहचान होती हैं?

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल या फिर सिर्फ रेफरल सेंटर?
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की पहचान उसकी भव्य इमारत से नहीं बल्कि उसकी स्वास्थ्य सेवाओं से होती है।
ऐसे अस्पताल में सामान्यतः उपलब्ध होना चाहिए—
**24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा।
**अत्याधुनिक आईसीयू।
**कैथ लैब।
**ऑक्सीजन प्लांट।
**विशेषज्ञ हृदय रोग, किडनी और न्यूरो चिकित्सक।
**प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ।
**तकनीकी कर्मचारी।
**गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस।
लेकिन आरोप है कि वर्तमान में हार्ट, किडनी,ब्रेन से जुड़े गंभीर मरीजों को कई बार सिम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल ,सिम्स अथवा अन्य संस्थानों में रेफर करना पड़ रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल भी गंभीर मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहा है, तो फिर जनता को इसका वास्तविक लाभ कब मिलेगा?

***200 करोड़ खर्च, फिर भी जीवनरक्षक सुविधाओं का इंतजार
विजय केशरवानी ने सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं:-
1)200 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं?

2)कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध होने के बावजूद कैथ लैब क्यों नहीं?

3)गंभीर मरीजों के लिए पूर्ण सुविधायुक्त एंबुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं?
4)नियमित विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति अब तक क्यों नहीं?
5)नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की स्थायी भर्ती क्यों नहीं हुई?
6)आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता तथा आवास व्यवस्था क्यों सुनिश्चित नहीं की गई?
स्व.दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर अस्पताल, लेकिन क्या उनकी विरासत के अनुरूप मिल रही सुविधाएं?
इस अस्पताल का नाम छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर रखा गया है।
यह नामकरण बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के आग्रह पर किया गया था।
कांग्रेस का कहना है कि स्व.दिलीप सिंह जूदेव केवल एक राजनीतिक नाम नहीं बल्कि जनभावनाओं का प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर बने अस्पताल को पूरी क्षमता से संचालित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसी के साथ कांग्रेस ने यह राजनीतिक सवाल भी उठाया है कि यदि भविष्य में इस अस्पताल को किसी निजी संस्था को सौंपने की कोशिश होती है, तो क्या बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला जनता के साथ खड़े होंगे?
**क्या सरकार हॉस्पिटल को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में हैं:-कांग्रेस नेता ने कहा है कि सरकार की मंशा हॉस्पिटल को निजी हाथों में सौंपने को है ,अगर ऐसा होगा तो कांग्रेस पार्टी एक बड़ा जन आंदोलन करेगी ।

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