जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को हाई कोर्ट का तीन सप्ताह अंदर सरेंडर करने का आदेश

अमित जोगी
स्व.रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी

बिलासपुर/ अरपा प्रवाह न्यूज़-शरद यादव

छ्त्तीसगढ़ के चर्चित 2003 में हुए जग्गी हत्या कांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर का आदेश दिया है ।
***विधानसभा चुनाव 2003 को “राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी “(एनसीपी )के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी राजधानी रायपुर में एनसीपी के बड़ा सम्मेलन करवाने वाले थे,ठीक सम्मेलन के एक दिन पूर्व राम अवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी,उसके बाद पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में भूचाल मच गया था ।
राज्य विधान सभा चुनाव में भाजपा के विजयी होने सरकार बनने के बाद राज्य की डॉ रमन सिंह सरकार ने जग्गी हत्या कांड की सीबीआई जांच कराई थी,जिसमें 29 आरोपी बनाये गए थे,इस मामले में अमित जोगी को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था ।
इसके बाद तत्कालीन कोर्ट में सीबीआई ने इस केस में सीबीआई ने चार्जशीट पेश किया था जिसमें 10 महीने जेल हुई थी,इसके तत्कालीन निचली कोर्ट में केस की सुनवाई चल रही थी,निचली अदालत ने 29आरोपियों में से मुख्य आरोपी अमित जोगी को बरी कर दिया था ।

**मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने साफ संकेत दिया कि अब इस केस में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश जारी करते हुए कहा कि अमित जोगी को तीन सप्ताह के पहले सरेंडर करने का आदेश दिया गया है,निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

रायपुर की एक अदालत ने 31 मई, 2007 को फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था।

सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने देरी के आधार पर 2011 में जांच एजेंसी की याचिका खारिज कर दी थी। छत्तीसगढ़ सरकार तथा मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग याचिका भी खारिज कर दी गई थी।

पिछले साल नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा था कि वह सीबीआई की उस याचिका पर फिर से विचार करे जिसमें जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई थी।

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