बिलासपुर/अरपा प्रवाह न्यूज़
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में महानदी,शिवनाथ,खारून प्रमुख नादियों के कायाकल्प की स्थिति के बारे में,नादियों की स्थिति प्रदूषण के मामले में गंभीर हो गया है,इनके के लिए जो योजनाएं बनी है,उनकी स्थिति को देखते हुए जल्दी रूपरेखा बनाई जाये, इसके अलावा 16 जगहों पर एसटीपी निर्माण की,मल-जल को रोकने के उपाय,एसटीपी से शुद्धीकरण होकर निकले जल को NGT द्वारा निगरानी की जाती है उसका ब्यौरा, सरकार द्वारा अरपा,हसदेव और केलों नदीयों के तट पर स्थापित ओद्योगिक इकाइयों का एनजीटी के निर्देशों कों पालन कराने क्या व्यवस्था की गई है ये सवाल वन पर्यावरण,जलवायु मंत्री से पूछा है ।
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन जलवायु राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने जवाब देते हुए बताया कि छ्त्तीशगढ़ और उड़ीसा में महानदी बहती है,खारुन नदी शिवनाथ,महानदी की सहायक नदी है ,राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NWUMP) के तहत सीपीसीबी मौजूद जैविक पदार्थ के स्तर के आधार पर प्रदूषित नदी खंडों (PRS)की पहचान करता है ।
जैव रसायन मांग (BOD) सांद्रता को जांच करता है ।
पीआरएस को 5 वर्गो में बांटा गया है:
प्राथमिकता वर्ग-1 सबसे अधिक प्रदूषित जिसका BOD वेल्यू 30 मिलीग्राम लीटर से अधिक प्राथमिकता वर्ग -5 को सबसे कम प्रदूषित है ।जिसका बोड़3-6मिलीग्राम लीटर है,सीपीबी द्वारा वर्ष-2025 -2022-2023 के जल गुणवत्ता आंकड़ों के आधार पर “जल गुणवत्ता की बहाली के लिए प्रदूषित नदी खंड “नामक नवीनतम रिपोर्ट प्रकाशित की गई है जो CPCB के वेबसाइट में https:/cpcb.nic.in/reports-3 पर उपलब्ध है ।
***नादियों प्रदूषित (PRS)भागों के पुनरुद्धार के लिए संबाधित राज्यसरकार संघ,राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा गठित नदी पुनरुद्धार समिति (RRC)द्वारा संबंधित राज्य संघ,राज्य क्षेत्र के प्रधान सचिव,पर्यावरण की समय देखरेख और समन्वय में में सभी प्रदूषित नदीयों को स्नान प्रयोजनों (अर्थात् BOD -3 मिलीग्राम लीटर और FC <500एमपीएन/100ML )के लिए उपयुक्त बनाने के लिए व्यापक कार्य योजनाएं तैयार की गई है,कार्य योजनाओं के कार्यो की प्रगति की समीक्षा राज्य स्तर पर (RRC) द्वारा और केंद्रीय स्तर पर जल शक्ति मंत्रालय में गठित केंद्रीय निगरानी समिति (CMC)द्वारा की जाती है ।
छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों द्वारा स्थापित ऑनलाइन सतत बहीस्राव प्रणाली निगरानी प्रणाली (OCEMS) का विवरण https://cpcb.nic.in.reports-3 पर उपलब्ध है ।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण सरक्षण बोर्ड (CECB) द्वारा नादियों के मल-जल के पानी के निर्वहन को रोकने के लिए 24एसटीपी चालू है और 16एसटीपी निर्माणधीन है ।
इसके अलावा यह जानकारी दी गई है कि ऐसे स्थानों पर मलगाद शोधन सयंत्र (FSTP)स्थापित किए गए है,जहाँ STP निर्माणाधीन है ।
ओड़िसा में 12 मलजल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) है,सभी चालू है और ये निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कर रहें है,ओड़िसा में 120 एफएसटीपी है ।
***जल प्रदूषण को रोकने सरकार द्वारा सख्त कदम उठाए गए है:
औद्योगिक प्रदूषण का विनिमियन संबंधित एसपीसीबी /पीसीसी द्वारा सहमति प्रणाली के तहत जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974 के विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से प्रवर्तित किया जाता है ।
**केंद्रीय राज्यऔर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी ),प्रदूषण नियंत्रण समितियाँ (पीसीसीएस)जलीय संसाधनों के प्रदूषण को रोकने और नियंत्रित करने के लिए जल (प्रदूषण नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम 1974 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम ,1986 के दोनों प्रावधानों को लागू कर रही है ।
पर्यावरण वन जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEF एंड सीसी) ने पर्यावरण संरक्षण नियम 1986 की अनुसूची -। के तहत विभिन्न “उद्योगों से पर्यावरण प्रदूषकों के उत्सर्जन या निर्वहन के लिए मानक अधिसूचित “किये है ।
ओद्योगिक क्षेत्र जिनके के लिए विशिष्ट मानक उपलब्ध नहीं है ,पर्यावरण संरक्षण नियम 1986 की अनुसूची -VI के तहत अधिसूचित सामान्य मानक लागू होते है ।
संपादक: शरद यादव
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