**दशहरे पर विशेष न्यूज़-शरद यादव
बिलासपुर/प्रदेश का अनूठा मंदिर जो दशहरें में एक बार वर्ष में रावण दहन के दिन मंदिर का पट खुलता है ,जहाँ पर सुबह से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं ये मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है ।शहर के हटरी चौक जूना बिलासपुर में स्थित सीताराम हनुमान मंदिर है ।इस मंदिर सैकड़ों लोगों ने दर्शन किया,सुबह से देर शाम तक भक्तों की लंबी क़तारें लगी रहीं है ।
एक नारियल से होती है मन्नत पूरी ,शहर के अनूठा हटरी चौक जूना बिलासपुर स्थित अद्भुत अलौकिक सीताराम हनुमान मंदिर जिसकी स्थापना शहर के पांडे परिवार ने सौ वर्ष से अधिक समय पहले कराया था।इस मंदिर की ख़ासियत है कि पूरे वर्ष में सिर्फ एक दिन सिर्फ़ दशहरे के दिन खुलता है ,ये परंपरा बरसों से चली आ रही है,ये पांडे परिवार की तीसरी पीढ़ी इस परंपरा को निभाते आ रहे है,इस वर्ष थोड़े समय के लिए ये मंदिर का पट खुला रहा है इसका कारण है परिवार में गमी होने के कारण इस मंदिर का का पट जल्दी बंद हो गया ।ये परंपरा टूटे ना करके भक्तों के दर्शन के लिये इस वर्ष पांडे परिवार ने मंदिर खोलने की जिम्मेदारी निभाते हुए सुबह 7.00बजे से शाम 4.00 बजे तक दर्शन के लिए मंदिर का पट भक्तों के लिए खोला गया,जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किया । जिनकी मन्नत एक नारियल पिछले वर्ष राम दरबार में चढ़ाया था मन्नत पूरी होने के बाद आज दर्शन कर मंदिर में नारियल चढ़ाया और भगवान को धन्यवाद दिया ।इसके बाद मंदिर का पट बंद हो गया और अब अगले वर्ष खुलेगा । जूना बिलासपुर हटरी चौंक निवासी बंटी बतरा ने मंदिर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस मंदिर का निर्माण हनुमान प्रसाद पांडे द्वारा सैकड़ों वर्ष पहले करवाया गया था । साल भर इस मंदिर में पूजा अर्चना परिवार के लोगों द्वारा किया जाता है एकदिन दशहरे के अवसर पर मंदिर सभी आम लोगों के लिए खोला जाता है इस मन्दिर के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी । अभी देखरेख तीसरी पीढ़ी हरीश पांडे कर द्वारा किया जा रहा है । आज सुबह से इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए शहर भर के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी जिन्होंने ने दर्शन कर लिया अपने मन्नत का नारियल को चढ़ाकर अगले वर्ष मन्नत पूरी होने पर भगवान का दर्शन करने पहुंचेंगे ,वहीं समय आभाव के चलते कुछ श्रद्धालु मंदिर में भगवान का दर्शन करने चूक गए जिनकों अगले एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा । शहर के इस अलौकिक मंदिर का सैकड़ों साल से भक्तों का अटूट विश्वास बना हुआ है ।








